रविवार, 19 मार्च 2017

711 . मातङ्गी ------ राजय जगमग माँ शिवरानिया।


                                        ७११
                                   मातङ्गी  
राजय जगमग माँ शिवरानिया। 
रतन सिंहासन बैसि विण ल' कर बजबैत मधुर लय ध्वनिआँ।। 
चकमक चान चमकि लस भालहिं मधु - मद - मूनल नैन। 
वल्लकि - निक्वण - मोदित कण - कण कलकल कौरमुखक श्रुत बैन।।
विपुल नितम्ब अरुण - पट - मण्डित उरसिज - निहित - निचोल। 
मुसुकि - मुसुकि मधु मतङ्गनन्दिनि शंखपत्र चुम जनिक कपोल।।
कदम - कुसुम - कृत - माल - कलित - धृत कवरि भार , चित्राङ्कित भल। 
न्यस्त एक पद - पदमहिं से रहि दाहिनि ' मधुप 'हुँ करथु नेहाल।।

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