शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

407 .कुछ अत्याचार भी किये मैंने

४०७ 
कुछ अत्याचार भी किये मैंने 
तो किसलिए 
कुछ घात - प्रतिघात भी सोंचे 
तो किसलिए 
खुद को सरेआम किया बदनाम 
तो किसलिए 
जो किया था न कभी सोंचा वो भी 
तो किसलिए 
होने थे जब खुशियों से दो चार 
पाये थे तब गमें हजार 
कर के इतना सब कुछ भी 
बचा न पाया था सच को तब भी !
तो किसलिए !

सुधीर कुमार ' सवेरा '

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